चंद्रमा और गणेश जी की कथा

"भगवान गणेश जी अपने मूषक पर सवार होकर जा रहे थे। अचानक मूषक के डरने से वे गिर पड़े। यह देखकर चंद्रमा हँसने लगा। चंद्रमा के अहंकार से क्रोधित होकर गणेश जी ने उसे श्राप दे दिया। बाद में चंद्रमा ने क्षमा माँगी, तो गणेश जी ने श्राप का प्रभाव कम कर दिया। यह कथा हमें अहंकार त्यागने और दूसरों का उपहास न करने की शिक्षा देती है। 🙏॥ श्री गणेशाय नमः ॥🙏"
चंद्रमा और गणेश जी की कथा
एक बार की बात है। भगवान गणेश जी अपने वाहन मूषक पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। उस दिन उन्होंने अपने भक्तों द्वारा अर्पित किए गए अनेक मोदक और मिठाइयाँ ग्रहण की थीं। इसलिए उनका पेट काफी भरा हुआ था।
रास्ते में अचानक मूषक ने एक साँप को देखा और डरकर उछल पड़ा। मूषक के उछलने से गणेश जी का संतुलन बिगड़ गया और वे नीचे गिर पड़े। गिरने के कारण उनके पेट से कुछ मोदक बाहर निकल आए।
आकाश में विराजमान चंद्रमा यह दृश्य देख रहा था। गणेश जी को गिरते देखकर वह जोर-जोर से हँसने लगा। चंद्रमा को अपने सौंदर्य और चमक पर बहुत अभिमान था। उसने गणेश जी का उपहास उड़ाते हुए कहा, "देखो, कैसे गिर पड़े!"
चंद्रमा की हँसी सुनकर गणेश जी को बहुत क्रोध आया। उन्होंने कहा, "हे चंद्रमा! तुम्हें अपने रूप का घमंड हो गया है। तुमने मेरा उपहास किया है, इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूँ कि आज से तुम्हारा सौंदर्य नष्ट हो जाएगा और जो भी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन तुम्हारा दर्शन करेगा, उसे झूठे कलंक का सामना करना पड़ेगा।"
श्राप मिलते ही चंद्रमा की चमक फीकी पड़ गई। वह भयभीत हो गया और अपनी गलती पर पश्चाताप करने लगा। सभी देवताओं ने भी गणेश जी से प्रार्थना की कि वे चंद्रमा को क्षमा कर दें।
चंद्रमा ने भी गणेश जी के चरणों में गिरकर क्षमा माँगी। गणेश जी का हृदय दयालु था। उन्होंने कहा, "मेरा श्राप पूरी तरह वापस नहीं होगा, लेकिन इसका प्रभाव कम हो जाएगा। तुम एक पक्ष में घटोगे और दूसरे पक्ष में बढ़ोगे। इस प्रकार तुम्हारी कलाएँ बनी रहेंगी।"
तब से चंद्रमा कृष्ण पक्ष में घटता है और शुक्ल पक्ष में बढ़ता है। साथ ही यह मान्यता भी प्रचलित हुई कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे मिथ्या कलंक लग सकता है।
कथा से शिक्षा
अहंकार हमेशा पतन का कारण बनता है।
किसी का उपहास नहीं करना चाहिए।
अपनी गलती स्वीकार कर क्षमा माँगने से संकट दूर हो सकता है।
भगवान गणेश करुणामय हैं और सच्चे पश्चाताप को स्वीकार करते हैं।
॥ श्री गणेशाय नमः ॥